कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, जिसे सामान्यतः POSH Act कहा जाता है, भारत सरकार द्वारा 2013 में लागू किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य कार्यस्थल पर महिलाओं को यौन उत्पीड़न से सुरक्षा प्रदान करना और शिकायत के निवारण की व्यवस्था करना है।
यौन उत्पीड़न की परिभाषा
POSH अधिनियम के अनुसार, निम्नलिखित किसी भी प्रकार के अवांछित व्यवहार को यौन उत्पीड़न माना जाता है:
- शारीरिक संपर्क और अनुचित व्यवहार
- यौन संबंध के लिए मांग या दबाव
- अश्लील सामग्री दिखाना
- अश्लील या आपत्तिजनक टिप्पणियाँ करना
- शत्रुतापूर्ण कार्य वातावरण बनाना
- यौन लाभ के बदले लाभ या धमकी देना
कार्यस्थल की परिभाषा
इस अधिनियम में "कार्यस्थल" का अर्थ केवल ऑफिस तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें शामिल हैं:
- ऑफिस या कार्यस्थल
- काम के लिए जाने वाले अन्य स्थान
- कंपनी द्वारा प्रदान किया गया परिवहन
संगठन की जिम्मेदारियाँ
- POSH नीति: हर संगठन में यौन उत्पीड़न से संबंधित स्पष्ट नीति होनी चाहिए।
- आंतरिक समिति (IC): 10 या अधिक कर्मचारियों वाले संगठन में कम से कम 4 सदस्यों की समिति बनाना अनिवार्य है, जिसमें आधे सदस्य महिलाएँ हों।
- वार्षिक रिपोर्ट: हर वर्ष मामलों की रिपोर्ट जिला अधिकारी को देना आवश्यक है।
- जागरूकता: कर्मचारियों को इस कानून के बारे में जानकारी देना।
शिकायत और निवारण
यदि किसी महिला के साथ उत्पीड़न होता है, तो वह 3 महीने के भीतर लिखित शिकायत दर्ज कर सकती है।
- जांच प्रक्रिया: समिति 90 दिनों के भीतर जांच पूरी करती है।
- समझौता (Conciliation): यदि चाहें तो बिना धन के समझौता किया जा सकता है।
- अन्य व्यक्ति द्वारा उत्पीड़न: बाहरी व्यक्ति के मामले में भी शिकायत दर्ज की जा सकती है।
- कार्रवाई न होने पर: संगठन पर जुर्माना या लाइसेंस रद्द किया जा सकता है।