जेंडर आधारित भेदभाव (Gender-Based Discrimination) का अर्थ है किसी व्यक्ति के साथ उसके लिंग (gender) के आधार पर अलग या अनुचित व्यवहार करना। यह समस्या पुरुषों और महिलाओं दोनों को प्रभावित कर सकती है, लेकिन समाज में महिलाओं को इसका अधिक सामना करना पड़ता है।
जेंडर भेदभाव के उदाहरण
- रोजगार (Employment): नौकरी देते समय यह मान लेना कि पुरुष बेहतर इंजीनियर होते हैं या महिलाएँ केवल नर्सिंग के लिए उपयुक्त हैं।
- शिक्षा (Education): कई परिवारों में लड़कियों की शिक्षा को महत्व नहीं दिया जाता।
- पोषण (Nutrition): परिवारों में लड़कों को बेहतर खाना और देखभाल मिलती है, जिससे लड़कियों में कुपोषण बढ़ता है।
जेंडर भेदभाव के कारण
- सामाजिक परंपराएँ: पुरानी सोच और रीति-रिवाज।
- शिक्षा की कमी: लोगों में जागरूकता की कमी।
- गरीबी: आर्थिक निर्भरता के कारण निर्णय लेने की शक्ति कम होना।
- अधिकारों की जानकारी का अभाव: लोग अपने कानूनी अधिकार नहीं जानते।
भारत में कानूनी सुरक्षा
- अनुच्छेद 15: लिंग के आधार पर भेदभाव को प्रतिबंधित करता है।
- अनुच्छेद 16: सभी को समान रोजगार के अवसर प्रदान करता है।
भेदभाव को कैसे रोकें
- जागरूकता फैलाएँ: लोगों को इसके बारे में समझाएँ
- स्वयं भेदभाव न करें: अपने व्यवहार में समानता रखें
- पीड़ितों का समर्थन करें: उनकी मदद करें
- अतिरिक्त प्रयास करें: जैसे लड़कियों की शिक्षा और स्वास्थ्य में सहयोग